लखनऊ। आईएमए में आयोजित गोष्ठी में जनसंख्या को कम करने के लिए परिवार नियोजन के साधन अपनाने की अपील की गयी। गोष्ठी में आईएमए के अध्यक्ष डा. पीके गुप्ता ने बताया कि विश्व जनसंख्या दिवस मनाने का विचार यूनाइटेड नेशन को तब आया जब 11 जुलाई 1987 को विश्व की आबादी 5 अरब से ज्यादा हो गई। तब से विश्व राष्ट्र संघ ने लोगों एवं सरकारों का ध्यान आकृष्ट करने के लिए 11 जुलाई 1990 से विधिवत रूप से विश्व जनसंख्या दिवस मनाने का निश्चय किया। इसके लिए प्रत्येक वर्ष अलग-अलग थीम के साथ इस दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य यह बताना है कि किस प्रकार जनसंख्या का दबाव हमारे पर्यावरण तथा विकास को प्रभावित करता है।
किस प्रकार जनसंख्या को कम करने का प्रयास करें। विश्व की आबादी 7 अरब 36 करोड़ के आस-पास है तथा भारत जैसे विकासशील देश में यह आंकड़ा चौकाने वाला है। यहाँ आज की आबादी 1 अरब 30 करोड़ के आस-पास है। आईएमए के सचिव डा. जेडी रावत ने बताया कि जनसंख्या विस्फोट का दुष्परिणाम सबसे अधिक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पर देखने को मिलता है। हमारे सीमित संसाधनों पर पड़ते है। इसके अतिरिक्त सड़क पर रोड ट्रैफिक, एक्सीडेन्ट, अस्पतालों एवं जांच केन्द्रों पर भीड़, विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं का जच्चा-बच्चा केन्द्रों पर दबाव। भारत की आबादी अमेरिका, इन्डोनेशिया, ब्रााजील, पाकिस्तान तथा बांग्लादेश की कुल जनसंख्या से ज्यादा है लेकिन भारत के पास विश्व का मात्र 2.4 प्रतिशत क्षेत्र है। यदि जनसंख्या की रफ्तार पर रोक नहीं लगी तो भारत 2030 तक दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन जायेगा।
इस मौके पर डा. हेमप्रभा गुप्ता, विभागाध्यक्ष,एवं प्रोफेसर, ओब्स्ट एवं गेनेई ऐरा मेडिकल कालेज तथा डा0 उर्मिला सिंह, वरिष्ठ प्रोफेसर, क्वीन मैरी हॉस्पिटल, केजीएमयू ने उपरोक्त विचार व्यक्त किया। संगोष्ठी में डा. वारीजा सेठ ने स्त्रीरोग विशेषज्ञ ने हाई रिस्क गर्भावस्था में परिवार नियोजन के साधन पर अपना व्याख्यान दिया। डा. स्मीता सिंह ने परिवार नियोजन में क्षेत्र में सरकारी एवं निजी क्षेत्र कि भागेदारी पर व्याख्यान दिया। इस मौके पर डा. आरवी सिंह, डा. संजय निरंजन, डा. रमा कान्त, डा. रूखसाना खान, डा. प्रानजल आग्रवाल, डा. अमिताभ रावत आैर डा. अलीम सिदिकी सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक मोैजूद थे।




