लखनऊ। हिन्दुओं की पवित्र तीर्थ कैलाश मानसरोवर की उच्च शिखर पर जन सामान्य व अपने अनुयायियों की मंगलकामना कर वापस आने पर श्री महन्त देव्यागिरि जी ने अपने अनुभवों को साझा करते हुये भारत सरकार और प्रदेश सरकार से अपील की कि कैलाश मानसरोवर को चीन से मुक्त होना चाहिए, क्योंकि वहां के लोगों को कैलाश मानसरोवर के प्रति कोई आस्था नहीं होती है और वे भारतीय तीर्थ यात्रियों को हेय की दृष्टि देखते हैं। जिसके कारण यात्रा के दौरान यात्रा में गये हुये श्रृद्धालु तीर्थयात्रियों को अत्यन्त कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
यहां तक चीन सरकार द्वारा यात्रा में लगे लोगों को हिन्दी, अंग्रेजी भाषा का कोई ज्ञान नहीं होता है और न वहां के प्रशासन द्वारा कोई द्विभाषिये की कोई व्यवस्था की जाती है। उन्होंने कहा कि जिस पवित्र भूमि झील और पर्वत को भगवान शिव की स्थली कहा जाता है वह चीन के कब्जे में है। इस पवित्र यात्रा के लिये इसे मुक्त होना आवश्यक है ताकि भारत के श्रद्धालु इस दुर्गम स्थल के आसानी से दर्शन कर सकें।
ट्रिप टू टैम्पल संस्था द्वारा व्यवस्थित कैलाश मानसरोवर यात्रा की व्यवस्था में संस्था के अमित पाण्डेय द्वारा तीर्थ यात्रा को भरपूर सहयोग किया गया। इस यात्रा में श्री महन्त के सानिध्य में 42 भक्तों का जत्था गया हुआ था जिसमें लखनऊ के अलावा अन्य शहरों के लोग भी शामिल थे। मनकामेश्वर मठ मंदिर से जुड़े 13 भक्तों जिसमें सर्वश्री गोविन्द प्रसाद अग्रवाल, श्रीमती आशा देवी, विशुन कुमार अग्रवाल, अजीत कुमार शुक्ला, संजय गुप्ता, सुनील वर्मा, राजेश अग्रवाल, श्रीमती कविता अग्रवाल, स्वर्ण कुमार मिश्रा, श्रीमती शोभा मिश्रा, देवेन्द्र गोयल व श्रीमती मीनू गोयल थी। यात्रा का समापन मनकामेश्वर मठ मंदिर भक्तों और सेवादारों भारत तिब्बत रक्षा मंच के सदस्यों ने श्री महन्त एवं सभी तीर्थ यात्रियों को पुष्प वर्षा एवं गाजे-बाजे के साथ स्वागत किया।
विशेष कार्याधिकारी जगदीश गुप्त ‘अग्रहरि’ के अनुसार श्री महन्त देव्यागिरि जी द्वारा शीघ्र ही कैलाश मानसरोवर यात्रा को सुगम बनाने एवं इसको चीन से मुक्त करते हुये 50 वर्षों की पूर्व की स्थिति बहाल करने हेतु ज्ञापन भारत के प्रधानमंत्री एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री जी को दिया जायेगा। श्री महन्त ने प्रदेश सरकार द्वारा कैलाश मानसरोवर यात्रा में तीर्थ यात्रियों को सब्सिडी प्रदान करने की सराहना करते हुये कहा कि इससे श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी और अपने अराध्य कैलाशपति के दर्शन का लाभ उठा सकेंगे।
इसके साथ ही भारत तिब्बत मंच की संरक्षक देव्यागिरि जी एवं यात्रा से लौटे यात्रियों ने कैलाश मानसरोवर को मुक्त कराने का संकल्प लिया। अपने संकल्प में उन्होंने कहा कि भारत तिब्बत रक्षा मंच द्वारा कैलाश मानसरोवर को चीन के आधिपत्य से मुक्त कराने के लिये अर्से से अभियान चल रहा है। हम पुनः इस पवित्र स्थान को चीन के आधिपत्य से मुक्त कराने का संकल्प लेते हैं।
स्वागत समारोह में प्रमुख रूप से डी0पी0एस0 राठौर, अमित गुप्ता, अवनीश त्रिवेदी, पंकज भगत, पं0 शिवराम अवस्थी, सोनी सिंह, अंकुर पाण्डेय, गोलू, मुकेश गुप्ता, श्रीमती उपमा पाण्डेय, अजय कुमार, संजय यादव, सरदार जी, दीपू ठाकुर, राहुल व मंटू सोनकर सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे।







