लखनऊ। महिलाओं और किशोरियों के साथ घरेलू हिंसा, दुराचार, एसिड अटैक, छेड़छाड़ और दहेज से पीड़ित वारदातों से निपटने के लिए लखनऊ सहित प्रदेश के 11 जिलों में बने रानी लक्ष्मी बाई आशा ज्योति केंद्र के वुमेन हेल्प लाइन 181 पर महिला की समस्या सुनते ही जरूरत के हिसाब से मदद के लिए टीम उनके घर पहुंचती हैं।
वुमेन हेल्प लाइन 181 के प्रोजेक्ट मैनेजर आशीष वर्मा बताते हैं कि अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2016 को वुमेन हेल्प लाइन 181 की शुरुवात की गयी। प्रतिदिन 3000 से 4000 काल्स आती हैं जिसमें 10 प्रतिशत काल्स काम की होती है। प्रदेश के 11 जिलों में बने आशा ज्योति केन्द्रों पर वुमेन हेल्प लाइन 181 के तहत 8 मार्च 2016 से 31 जनवरी 2017 तक वाराणसी में 306, कानपुर में 314, लखनऊ में 291, गाजियाबाद में 185, मेरठ में 182, इलाहाबाद में 140, आगरा और गाजीपुर में 102, गोरखपुर में 75, बरेली में 54, कन्नौज में 45 मामले दर्ज किये गये है। फरवरी 2017 तक 43.56 प्रतिशत मामले घरेलू हिंसा और 8.53 प्रतिशत मामले एसिड के छेड़छाड़ के 8.03 प्रतिशत, मानसिक तनाव 4.74 प्रतिशत, आत्महत्या के प्रयास के मामले 3.60, बाल विवाह पर 2.57 प्रतिशत आदि मामले दर्ज हुए हैं।
वह बताते हैंं कि देश में महिलाओं को उनका हक दिलाने का काम रही संस्था नेशनल कमीशन फॉर वीमेन के आंकड़ों के अनुसार भारत में घरेलू हिंसा के मामले सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में हैं। वर्ष 2015-16 में अकेले उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा के मामलों की संख्या 6,110 थी, जबकि दिल्ली में 1,179, हरियाणा में 504, राजस्थान में 447 और बिहार में 256 मामले दर्ज हैं। कृष्णानगर थाने में फरवरी माह में एक महिला ने 181 पर फोन करके बताया था कि उसके पति पांच महीने से उसकी 15 साल की बेटी के साथ दुष्कर्म करते हैं।
181 की प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर फलक रहमान बताती हैं, महिला के पति को गिरफ्तार कर लिया गया है उनकी बेटी को कस्तूरबा गांधी में पढ़ाने की बात चल रही है, उस महिला की हम पूरी तरह से मदद कर रहे हैं। मार्च महीने में बिजनौर जिले से एक काल आयी थी जिसमे महिला का पति शराब के नशे में खूब-मारपीट करता था, महिला को मायके में छोड़कर 9 महीने के बच्चे को लेकर पति चला गया, जैसे ही टीम को पता चला तुरंत काउंसलिंग की गयी, पति पत्नी को बच्चे के पास ले गया। ऐसे हजारों मसले एक हेल्पलाइन के द्वारा सुलझाये गये हैं।
इस सेंटर पर टीम लीडर के पद पर काम कर रही रचना केसरवानी (23 वर्ष) बताती हैं कि यहाँ काम करने के दौरान पता चला कि महिलाओं के साथ उनके अपने ही किस तरह घटनाओं को अंजाम देते हैं, एक साल में 10 हजार मामले आये हैं जिनमें सभी का निस्तारण किया गया है।
प्रमुख सुविधाएं –
- आकस्मिक चिकित्सा सेवा
- 1098 चाइल्ड लाइन सेवा का संचालन
- 1090 महिला हेल्पलाइन
- 100 पुलिस सहायता
- 102, 108 चिकित्सा हेल्पलाइन
- नि:शुल्क हेल्पलाइन नंबर रेक्स्यू वैन-181