लखनऊ। वेतन विसंगति, पद सर्जन, पदों का पुर्नगठन, भत्तों का पुनरीक्षण, पुरानी पेंशन बहाली, गलत तबादले निरस्त करने सहित 14 सूत्री मांगों को लेकर प्रदेश के लगभग पांच हजार फार्मासिस्टों ने स्वास्थ्य महानिदेशालय का घेराव कर प्रदर्शन किया। सुबह से शुरू हुए प्रदर्शन में महानिदेशालय में अंदर के लोग बाहर नहीं निकल सके आैर बंधक बने रहे। दोपहर दो बजे आस-पास महानिदेशक ने बाहर आकर फार्मासिस्टों से बातचीत करके आश्वासन दिया। तब प्रदर्शन समाप्त हुआ। महानिदेशक ने जल्द ही उनकी मांगों पर बैठक कर निदान करने का आश्वासन दिया है। प्रदर्शन में फार्मासिस्टों के इंटर्नशिप को मनमाने तरीके से कराने पर रोक लगाने की मांग की गयी। इस दौरान सड़क तक जाम की स्थिति बन गयी।
सुबह से प्रदेश के विभिन्न जनपदों से फार्मासिस्टों का महानिदेशालय पहुंचना शुरू हो गया था। जो जहां पहुंचा वही से जुलूस बनाकर नारे बाजी करते हुए बैनर लेकर चल पड़ा। दोपहर बारह बजे तक अलग अलग रास्तों से लगभग पांच हजार फार्मासिस्टों ने पहुंच कर प्रदर्शन शुरू कर दिया था। महानिदेशालय के घेराव के कारण अंदर से लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया था। अंदर भी लोग नहीं जा पा रहे थे। महासंघ के अध्यक्ष सुनील यादव ने कहा कि फार्मासिस्टों का लगातार शोषण किया जा रहा है। मांगों पर आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन पूरा नहीं कि या जा रहा है।
आये दिन फार्मासिस्टों पर आरोप लगाकर उत्पीड़न कि या जाता है। उन्होंने कहा कि शासन स्तर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जब कि फार्मासिस्ट अपनी भूमिका इमानदारी पूर्वक निभा रहे है। उन्होंने आरोप लगाया कि फार्मासिस्टों के इंटर्न में महानिदेशालय स्तर पर धांधली हो रही है। जब कि यह सीएमओ व सीएमएस स्तर पर काम होना चाहिए। महानिदेशक ने इस पर कार्रवाई कर मांग पूरी करने के लिए कहा है। प्रदर्शन में महामंत्री केके सचान, संदीप मडोला, वरिष्ठ उपाध्यक्ष उपेन्द्र सिंह, उपाध्यक्ष राजेद्र पटेल, संघटन मंत्री आरपी सिंह आदि ने सम्बोधित करते हुए एक मत से कहा कि मांगे पूरी होने तक आंंदोलन चलता रहेगा।
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