कैंसर संस्थान : न्यूरोसर्जन का पलायन, इस्तीफे से बढ़ी मरीजों की चिंता

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लखनऊ। चक गंजरिया स्थित Kalyan Singh Super Specialty Cancer Institute में डॉक्टरों के लगातार हो रहे पलायन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब संस्थान के न्यूरो सर्जरी विभाग के एक और विशेषज्ञ डॉक्टर ने नौकरी छोड़ दी है, जिससे ब्रेन ट्यूमर, ब्रेन कैंसर और गंभीर न्यूरो संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की मुश्किलें और बढ़ने की आशंका है।

संस्थान में वर्तमान समय में कुल 32 नियमित डॉक्टर तैनात हैं, जबकि आठ डॉक्टर बॉन्ड के तहत सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा एक महिला डॉक्टर कानपुर से प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। इस तरह कुल 41 डॉक्टरों के सहारे संस्थान की चिकित्सा सेवाएं चल रही हैं। न्यूरो सर्जरी विभाग में तीन नियमित और दो बॉन्ड पर तैनात डॉक्टर थे, लेकिन अब नियमित चिकित्सक डॉ. मयंक सिंह ने इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि उनका चयन Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences में हो गया है।

अब तक 28 डॉक्टर छोड़ चुके हैं नौकरी
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज हर दिन इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं। खासतौर पर ब्रेन ट्यूमर और न्यूरो कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए समय पर सर्जरी बेहद जरूरी होती है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के चलते इलाज में देरी अब मरीजों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

जानकारी के मुताबिक अब तक संस्थान से 28 से अधिक डॉक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं, जबकि कई अन्य विशेषज्ञ भी संस्थान छोड़ने की तैयारी में हैं। लगातार हो रहे इस पलायन से संस्थान की महत्वपूर्ण चिकित्सा सेवाओं पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

कम वेतन और भत्तों से नाराज डॉक्टर
डॉक्टरों की नाराजगी की मुख्य वजह वेतन और भत्तों में असमानता बताई जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि King George’s Medical University, Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences और Dr Ram Manohar Lohia Institute of Medical Sciences में तैनात विशेषज्ञों और कैंसर संस्थान के डॉक्टरों की योग्यता समान है, लेकिन वेतन-भत्तों में बड़ा अंतर है। लंबे समय से विशेषज्ञ इस विसंगति को दूर करने की मांग कर रहे हैं।

इलाज के लिए भटक रहे दूर-दराज के मरीज
विशेषज्ञ डॉक्टरों के लगातार संस्थान छोड़ने का असर सीधे मरीजों पर पड़ रहा है। दूर-दराज जिलों से आने वाले कैंसर मरीजों को ओपीडी से लेकर ऑपरेशन की तारीख तक के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कई गंभीर मरीजों के लिए इलाज में हर दिन की देरी बीमारी को और खतरनाक बना सकती है।

वेतन विसंगति और प्रशासनिक कारणों के चलते पिछले कुछ वर्षों में कई वरिष्ठ डॉक्टर संस्थान छोड़ चुके हैं। इनमें डॉ. सोनम सुमन, डॉ. गौरव सिंह, डॉ. ईशा जफा, डॉ. साई सरन, डॉ. इंदु शुक्ला, डॉ. सौरभ विज, डॉ. स्वाति, डॉ. तन्मय घटक, डॉ. तापस सिंह, डॉ. बृजेश मिश्रा, डॉ. सत्य प्रकाश, डॉ. एचएस पाहवा, डॉ. वंदना और डॉ. पारुल जैसे नाम शामिल हैं।

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