टैक्स माफियाओं में सर्जिकल स्ट्राइक करेंगी सेट्रल मोबाइल यूनिट

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लखनऊ । सुपारी, लोहा, टाइल्स के अलावा मेंथा में करोड़ों की टैक्सचोरी करके योगी सरकार के खजाने में सेंधमारी कर रहे टैक्स माफियाओं पर वाणिज्य कर मुख्यालय की सेन्ट्रल मोबाइल यूनिट एक बड़ा सर्जिकल स्ट्राइक करने की तैयारी में है। सीबीआई की तर्ज पर यहां की रिसर्च टीम के बीस विशेषज्ञ अधिकारी लगातार टैक्स चोरी में संलिप्त कुछ बड़े माफियाओं पर नजर टिकाएं हुई है।

टीम के इन्हीं अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर मुख्यालय की सेन्ट्रल मोबाइल यूनिट के अधिकारी सर्जिकल स्ट्राइक करने को तैयार है। लखनऊ में दो पान- मसाला फैक्ट्रियों पर हुई छापे की कार्रवाई ने रिसर्च यूनिट की धमक का अहसास कराया है। इसके अधिकारियों को कार्रवाई का निर्देश सीधे कमिश्नर से मिल रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में लखनऊ, कानपुर, गाजियाबा, नोएडा, फैजाबाद, व सहारनपुर में सेन्ट्रल मोबाइल यूनिट छापे की बड़ी कार्रवाई करेगी।

बताते चले कि पहली जुलाई को जीएसटी लगने के बाद तीन माह तक जांच बंद रहने के दौरान टैक्सचोरी में संलिप्त लोग बेखौफ होकर अपना कारोबार कर रहे थे। अक्टूबर से जांच तो शुरू हुई लेकिन टैक्सचोरी के बड़े मामलों का खुलासा नहीं हो सका, लेकिन अब वे दिन चले गए हैं जबकि जांच के लिए जिलों की टीमों पर ही निर्भर रहना पड़ता था। कानपुर में एडीशनल कमिश्नर- ग्रेड-2 केशव लाल पर आयकर का शिकंजा कसने के बाद जो तथ्य समाने आए हैं, उनमें खुलासा हुआ है कि छापों को लेकर एडीशनल कमिश्नर व ज्वाइंट कमिश्नरों के बीच जंग चल रही थी, यही कारण था कि कानपुर में टैक्स माफियाओं के हौसले इस कदर बुलन्द थे कि कानपुर व लखनऊ में पान-मसाला फैक्ट्रियों में सुपाड़ी सप्लाई की जा रही थी।

जीएसटी लगने के बाद मुख्यालय के एडीशनल कमिश्नर आनंजनेय कुमार सिंह ने टैक्स माफियाओं पर नकेल कसने के लिए ऑन-लाइन सिस्टम को बड़ा हथियार बनाया है। इसके लिए राज्य कर आयुक्त मुकेश मेश्राम के आदेश पर चार टीमों का गठन किया गया है। टीम ए के नेतृत्व ज्वाइंट कमिश्नर ओम प्रकाश तिवारी, बी टीम का गठन ज्वाइंट कमिश्नर आनन्द पाण्डेय, सी टीम का नेतृत्व कमलेश कुमार श्रीवास्तव व डी टीम का नेतृत्व अतुल कुमार श्रीवास्तव कर रहे हैं।

जीएसटी लगने के बाद सभी रिटर्न ऑन-लाइन हो जाने से कारोबारियों द्वारा कितनी खरीद- बिक्री की जा रही है, इस पर नजर रखी जा रही है। जिस फर्म पर छापा डाला जाएगा, उसकी अनुमति रिसर्च टीम को सीधे राज्य कर आयुक्त देगें।

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