फेफडे़ और स्वास्थ्य – डा0 सूर्यकान्त

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फेफड़े हमारे प्रमुख अंगो में से एक अंग है, जो कि हमारे शरीर में एक जोड़ी होते हैं। हमारे फेफड़ों का प्रमुख कार्य रक्त का शुद्धीकरण करना होता है। फेफड़ें सांस और रक्त के बीच गैसों का आदान-प्रदान करते है। फेफड़ों के द्वारा वातावरण से आक्सीजन लेकर, रक्त परिसंचरण में प्रवाहित होती है और रक्त से कार्बन-डाइऑक्साइड को निकाल कर वातावरण में छोड़ी जाती है।

2008 में, पूरे विश्व में सभी बीमारियों से होने वाली मौतों मे, अकेले फेफड़ों की बीमारियों से होने वाली मौतों की संख्या 92 लाख थी। भारत में, सभी बीमारियों से होने वाली मौतों में, अकेले 11 प्रतिशत लोग फेफड़ों की बीमारियों से मरते है। अस्पतालों में होने वाली सभी भर्तियों में लगभग 10 प्रतिशत मरीज अकेले फेफड़ों की बीमारियों के कारण भर्ती होते है।

फेफड़ों से सम्बन्धित बीमारियां-

1. क्षय रोग (टी0बी0) –

टी0बी0 एक संक्रमक रोग है, जो कि माईको-बैक्टेरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक जीवाणु से होता है। जब पीड़ित व्यक्ति खांसता, छींकता या थूकता है, तो उस थूक में मौजूद जीवाणु हवा में मिल जाते है और आस-पास में संक्रमण पैदा करते है। टी0बी0 एक प्रमुख वैष्विक स्वास्थ समस्या है। वर्ष 2014 में सम्पूर्ण विष्व में एक करोड़ टी0बी0 के नये मरीज पाये गये जिनमे से कुल 14 लाख लोगों की मौतें हुयी। डब्लू एच ओ रिपोर्ट के अनुसार 2014 में भारत में दुनिया के एक चैथाई मामले पाये गये (लगभग 28 लाख) टी0बी0 से मरने वाला हर पांचवा व्यक्ति भारतीय होता है।

भारत में हर 5 मिनट में टी0बी0 से दो मौतें होती है (प्रतिदिन एक हजार से ज्यादा)। लगभग चार लाख तेईस हजार लोग प्रतिवर्ष टी0बी0 की बीमारी से मरते है। हमारे प्रदेश में लगभग 7.5 लाख टी0बी0 के मरीज है, जिनमे से २.५ लाख सरकारी और लगभग 2.५ लाख प्राइवेट सेक्टर से उपचार ले रहे है। चिन्ता का विषय यह है कि प्रदेश में बचे 2.5 लाख टी0बी0 के रोगियों का पता नही चल पा रहा है।

2. सी0 ओ0 पी0 डी0 –

सी0 ओ0 पी0 डी0 एक लम्बे समय की बीमारी है जो कि फेफड़ें सम्बन्धित बीमारियों में एक प्रमुख बीमारी है। इसके प्रमुख कारणों में धूम्रपान, वायु प्रदुषण व किसी भी प्रकार का धुआं है। सी0ओ0पी0डी0 के भारत मे लगभग 3 करोड़ रोगी है।

3. दमा (अस्थमा) –

दमा भी स्वांस रोगों में एक प्रमुख रोग है। जिसके प्रमुख कारणों में, अनुवांषिकी, वायु प्रदुषण, खान-पान, तनाव आदि हो सकते है। इस बीमारी में मरीज के श्वास नलियों में सूजन आ जाती है और मरीज को सांस लेने में कठिनाई होती है। पूरे विष्व में लगभग 30 करोड़ लोग तथा भारत में लगभग 3 करोड़ लोग दमा से ग्रसित है। अगर हम भारत की बात करें तो लगभग 1 लाख मौतें प्रतिवर्ष दमा से हो जाती हैं।

4. निमोनिया तथा फेफडों के अन्य संक्रमण –

निमोनिया एक संक्रमण से होने वाली बीमारी है, जिसके प्रमुख कारणों में, जीवाणु, बिषाणु, फंगस तथा अन्य पैरासाइट हो सकते है। इसमे मरीज को तेज बुखार, ठण्ड के साथ कंपकपी, सांस लेने में दिक्कत, बदन दर्द खांसी आना आदि सामिल है। फेफडो से सम्बंधित बीमारियों से होने वाली मौतों में सबसे ज्यादा मौतें निमोनिया तथा अन्य संक्रमित बीमारियों से होती है।

2015 में, डब्लू0एच0ओ0 के अनुसार कुल फेफडे से सम्बंधित संक्रमण के 37,485,713 मरीज विश्व में पाये गयें जिसमें करीब 2893 मरीजों की मौत उपर्युक्त कारणों से हुयी।

5. फेफडे़ का कैंसर –

फेफडों का कैंसर, सामान्य रूप से होने वाने कैंसर से होने वाली मौतों में एक प्रमुख कारण है। फेफडों के कैंसर में, फेफडे की कोशिकाएं अनियत्रित गति से बढती जाती है। फेफडें के कैंसर के प्रमुख कारणों में, ध्रूमपान, पर्यावारण प्रदुषण, दैनिक इंड्रास्ट्रियल कार्य इत्यादि है।

फेफडों के कैंसर के प्रमुख लक्षण खांसी आना, खांसी में खून आना, वजन घटना, भूख न लगना, सांस लेने में कठिनाई होना, आवाज में बदलाव आ जाना है।

6. स्लीप एपनिया –

स्लीप एपनिया के लक्षणों में जोर के खर्रराटे आना, रात में अचानक नींद से उठजाना, दिन में सजगता की कमी, चिडचिडापन, सांस की समस्या बार -बार नींद आना आदि है। इसके प्रमुख कारणों में भोजन का अधिक होना, धूम्रपान, बड़े आकार की गर्दन (17 इन्च से ज्यादा पुरूषों में और महिलाओं में 16 इन्च से ज्यादा होना) आदि।

7. फेफड़े की दुर्लभ बीमारियां –

दुर्लभ बीमारियों में फेफडों में सिकुडन की बीमारी जिसको इन्टरस्टीसियल लंग डीसीज कहते है। जिसका प्रमुख कारण, पर्यावरण, अक्यूपेसन, पशु-पक्षियों का एक्स्पोजर और कुछ कारण रहित होते है। वैश्विक स्तर पर इस बीमारी के लगभग 50 लाख मरीज, जबकि भारत में लगभग 10 लाख मरीज मौजूद है।

फेफडें संबन्धित बीमारियों में प्रमुख कारण –

फेफडें संबन्धित बीमारियों के प्रमुख कारणों में, वायु प्रदुषण, धूम्रपान करना, चूल्हे पर खाना बनाना (बायोमास फ्यूल), स्वाचलित यंत्र (आटोमोबाइल), इंड्रास्ट्रियल कार्य, संक्रमण, खान-पान (फास्टफूड का ज्यादा सेवन) इत्यादि है।

फेफड़ें संबन्धित बीमारियों के बचाव के उपाय/रोकथाम –

वायु प्रदूषण पर रोकथामः- वायु प्रदूषण को हम पौधा रोपड़ करके, आटो मेाबाइल का कम से कम प्रयोग, फैक्ट्रियो को आवसीय परिसर से दूर स्थापित करके तथा निर्माण कार्यो मे कमी लाकर, कम कर सकते है।

धूम्रपान पर रोकः-

भारत मे लगभग 12 करोड़ लोग धूम्रपान का सेवन करते है। धूम्रपान जो कि सार्वजनिक स्थानो पर प्रतिबन्धित है, सरकार द्वारा इसका सख्ती से पालन कराया जाना चाहिए।

लकड़ी के चूल्हे की जगह एल.पी.जी. गैस का प्रयोग –

लकड़ी के चूल्हो का कम से कम प्रयोग करना चाहिए, चूल्हो के स्थान पर एल0पी0जी0 गैस (प्राकृतिक गैस) के उपयोग को बढ़ाया देना चाहिए। गॅाव मे चूल्हो के धुएं से होने वाली बीमारियों को ध्यान मे रखते हुए भारत सरकार द्वारा उज्जला योजना का 01 मई 2016 मे शुरू किया जाना, इस दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

संक्रमण से बचाव-

संक्रमित व्यक्ति का मास्क लगाना, खुले स्थान पर रखना (आइसोलेशन) टी0बी0 के संक्रमण से बचाव से बचने हेतु, भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा टीबी नोटीफिकेशन एंड एक्टिव केस फाइंडिंग- जैसी योजनायें प्रारम्भ करना तथा इसके साथ ही भारत सरकार द्वारा 500 रू. प्रतिमाह हर टी0बी0 के मरीज को पोषण भत्ता देने की घोषणा एक सराहनीय पहल है, इसके द्वारा निश्चित रूप से टी0 बी0 के संक्रमण/फैलाव में कमी लाया जा सकेगा।

टीकाकरण –

  • अन्य संक्रमित बीमारियों को रोकने के लिए वैक्सीन (टीकाकरण) का भी महत्वपूर्ण योगदान लिया जा सकता है।
  • इसके साथ साथ बीमारियों को रोकने में प्रणायाम/योग विधि के योगदान को भी नकारा नहीं जा सकता।

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