सेक्स से पहले यह जरुर करें…

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लखनऊ । गुर्दा प्रत्यारोपण करा चुके लोगों ने कहा कि दिक्कतें और परेशानियां के जीवन का हिस्सा हैं। किसी के पास कम दिक्कतें हैं तो किसी के पास अधिक। चाहे वो बीमारी हो या फिर और दिक्कत। ऐसे हालात में इंसान को हिम्मत से काम लेने की जरूरत होती है। पीजीआई में गुरुवार को विश्व किडनी दिवस पर आयोजित जागरुकता कार्यक्रम में गुर्दा प्रत्यारोपण करा चुके लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। इन लोगों ने इलाज से लेकर पारिवारिक, समाजिक व आर्थिक दिक्कतें पर चर्चा की। इसके अलावा डाक्टरों ने भी महत्वपूर्ण जानकारी दी।

डा. राम मनोहर लोहिया संस्थान की गुर्दा रोग डा. नम्रता राव ने बताया कि मूत्र मार्ग संक्रमण (यूटीआई) के कारण भी गुर्दा खराब हो जाता है। इससे बचने के लिए मासिक धर्म के दौरान सेनटरी पैड बदलें। सेक्स से पहले और बाद में यूरीन करने जरूर जाएं। स्पर्म जेली का इस्तेमाल कतई न करें। दिक्कत होने पर डॉक्टर की परामर्श लें। पीजीआई के यूरोलॉजी विभाग के डॉ. एमएस अंसारी बताते हैं कि यदि गर्दे में पथरी है तो इसकी कतई अनदेखी न करें। डॉक्टर की राय लें। क्योंकि 10 से 15 फीसदी मामलों में गुर्दा खराबी की वजह पथरी होती है। गुर्द की पथरी की दिक्कत महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में ज्यादा होती है।

अपने अनुभव बताते हुए पूर्व डीजीपी एल बनर्जी बताते हैं, उन्होंने वर्ष 2011 में गुर्दा प्रत्यारोपण कराया था। अब वो सामान्य लोगों की तरह जीवन यापन कर रहे हैं। श्री बनर्जी ने बताया कि सही वक्त पर इस बीमारी का पता चल जाए तो दवा से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। अमूमन लोग गलत इजाज कराते रहते हैं, जिसकी वजह से गुर्दा ज्यादा खराब हो जाता है। फिर प्रत्यारोपण की आखिरी रास्ता बचता है। वो कहते हैं कि तनाव से बचें। खानपान, जीवन शैली संयमित रखें।
गुर्दा रोगियों के लिए पेरीटोनियल डायलिसिस काफी मददगार है। खासकर उन लोगों के लिए बढ़िया है जो गुर्दा प्रत्यारोपण नहीं कराना चाहते हैं। सेवानिवृत्त शिक्षक प्रो. केपी कुलश्रेष्ठ बताते हैं कि उन्हें वर्ष 2008 से गुर्दे की बीमारी हैं। उन्होंने प्रत्यारोपण नहीं कराया। वर्ष 2010 से लगातार पेरीटोनियल डायलिसिस के सहारे सामान्य जीवन जी रहे हैं। वो बताते हैं कि लगातार डॉक्टर के संपर्क में रहता हूं।

साथ ही गुर्दे की बीमारी से पीड़ित मीना चौधरी बताती हैं कि उन्होंने गुर्दा प्रत्यारोपण कराने के बजाए पेरीटोनियल डायलिसिस का रास्ता चुना। वो नौ साल से पेरीटोनियल डायलिसिस करा रही हैं। बीमारी के बावजूद वो घर के कामों में हाथ भी बटाती हैं। वो बताती हैं कि घरवालों के सहयोग के साथ ही खुद के आत्म विश्वास की वजह से आज जिंदा हूं।

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