सरकारी डाक्टर प्राईवेट प्रैक्टिस करते मिले तो यह मिलेगी सजा

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लखनऊ। प्राईवेट प्रैक्टिस करते हुए पकड़े जाने पर सरकारी अस्पताल में तैनात डाक्टर पर मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ( एमसीआई) में पंजीकरण निरस्त भी हो सकता है। इसके साथ ही जिस नर्सिंग होम में प्राईवेट प्रैक्टिस करते पकड़ा गया उसका लाइसेंस भी निरस्त किया जाएगा। आयकर की जांच भी की जाएगी। शासन ने लगातार मिल रही शिकायतों के बाद सरकारी अस्पतालों में तैनात डाक्टरों पर द्वारा प्राईवेट प्रैक्टिस करते हुए पकड़े जाने पर कड़ी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। प्रमुख सचिव शासन प्रशांत द्विवेदी ने सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी के अलावा महानिदेशक को निर्देश भेज कर निर्देशानुसार तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

प्रमुख सचिव प्रशांत द्विवेदी ने जारी निर्देश में कहा है कि शासन के निर्देशों के बावजूद प्रादेशिक चिकित्सा सेवा सवर्ग के डाक्टर सरकारी अस्पतालों में तैनाती के बाद भी प्राईवेट प्रैक्टिस की शिकायते व सूचनाएं विभिन्न श्रोतों से लगातार मिल रही है। यह शासन के निर्देशों के बावजूद प्राईवेट प्रैक्टिस करना कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 के प्राविधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। इसको शासन ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश जिलाधिकारियों व मंडलायुक्त को देते हुए कहा है कि ऐसे डाक्टरों की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई जाए ताकि जनता को बेहतर इलाज मिल सके।

उन्होंने कहा है कि इसके लिए सरकारी डाक्टर (ऐलोपैथिक ) प्रभावी कार्रवाई के लिए गठित सर्तकता समिति की त्रिमासिक बैठक करायी जाए आैर शिकायतों को सुनकर गंभीरता पूर्वक कार्यवाई की जाए। प्राईवेट प्रैक्टिस पर रोक के लिए व्यापक प्रचार प्रसार के लिए महत्वपूर्ण बिंदुओं पर होर्डिग्स लगायी जाए। इसके साथ ही सम्बधित नर्सिंग होम के खिलाफ भी अनुशासनिक कार्रवाई करते हुए लाइसेंस निरस्त किया जाए। सरकारी डाक्टर पर प्राईवेट प्रैक्टिस की पुष्टि होने पर उसे भुगतान किये प्रैक्टिस बंदी भत्ता की वसूली की कार्रवाई की जाए। यह भी देखा जाए कि प्राईवेट प्रैक्टिस से अर्जित आय से आयकर दे रहा है कि इसकी भी जांच करायी जाए।

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