पुरानी पेंशन बहाली को लखनऊ में जुटे दो लाख से ज्यादा केंद्र व राज्य कर्मी

वार्ता विफल, पेंशन बहाली तक जारी रहेगा आन्दोलन, विधानसभा घेरी

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लखनऊ – पुरानी पेंशन की बहाली की मांग को लेकर सोमवार को राजधानी लखनऊ के में लगभग दो लाख के ज्यादा कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी जुटे। कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी-पुरानी पेंशन बहाली मंच के तत्वाधान में इको गार्डन में आयोजित इस महारैली में पहुंची भारी भीड़ को देखकर मंच के नेता उत्साहित दिखे और एलान किया कि जब तक सरकार पुरानी पेंशन बहाल नहीं कर देती तब तक यह शंखनाद नहीं रूकेगा। नेताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पुरानी पेंशन बहाली का यह प्रचण्ड रूप अब हर राज्य में दिखाई पड़ेगा। उधर उप मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुई मंच के प्रतिनिधियों की बैठक विफल हो गई।

कर्मचारी शिक्षक अधिकारी नेताओं ने कहा कि देश के लगभग 2.50 करोड राज्य कर्मचारी और 32 लाख केन्द्रीय कर्मचारियों की नई पेंशन योजना के तहत अब तक लगभग दस हजार करोड़ रूपये नई पेंशन के नाम पर केन्द्र और राज्य कर्मचारियों के नाम से लिए गए। लेकिन इस बड़ी धनराशि का कोई लेखा जोखा सरकारों के पास नही है। वक्ताओं ने कहा कि अगर पुरानी पेंशन बहाल नहीं होती तो यह तय मानों की 2019 में केन्द्र सरकार उन लोगों को भी पेंशन न देने का ऐलान कर देगी जिन्हे देने का वायदा उसने किया है और जिन्हें वर्तमान में पेंशन मिल रही है। नेताओं ने कहा कि हम अपनी पुरानी पेंशन बहाली के लिए मोर्चा खोल चुके है। अब परिणाम की चिन्ता नही है।

महारैली में आए करीब 2.30 लाख लोगों को सम्बोधित करते हुए कामरेड शिवगोपाल मिश्रा ने कहा कि सरकार को केन्द्र और राज्य कर्मचारियों को उनका हक ‘‘पेंशन’’ तो देनी ही पडेगा। वहीं मंच संयोजक हरिकिशोर तिवारी ने कहा कि अब अगर सरकार इस महारैली के बाद भी ठोस परिणाम नहीं देती तो सरकार और उसके कर्मचारियों और शिक्षकों का टकराव तय माना जाए। पुरानी पेंशन बहाली के लिए महौल बन चुका है अब फैसला सरकार को लेना है। अगर सरकार फैसला नही लेती तो परिणाम ठीक नहीं होगें।

मंच के सदस्यों ने घेर ली विधानसभा

उधर इको गार्डन में कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी-पुरानी पेंशन बहाली मंच की आमसभा चल रही थी, एक प्रतिनिधि मण्डल उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से मिले संदेश में मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा और मुख्य सचिव सहित शासन अफसरों के साथ वार्ता के लिए रवाना हुआ, तो दूसरी तरफ वार्ता में कुछ सहमति न मिलने की आशंका के चलते लगभग हजार से ज्यादा लोगों ने डिप्लोमा इंजीनियर्स और नगर निगम कार्मिकों तथा राजकीय वाहन चालक महासंध के सदस्यो के साथ विधान भवन का घेराव कर लिया। लगभग आधें घन्टे तक चले इस घेराव की सूचना जब मंच के संयोजक को मिली तो उन्होंने सदस्यों से अपील कर उन्हें घेराव रोकने का निर्देश दिया।

उपमुख्यमंत्री से वार्ता विफल

पुरानी पेंशन बहाली मंच के आन्दोलन के बीच शासन स्तर पर आमंत्रण के बाद मंच का ग्यारह सदस्यीय प्रतिनिधि मण्डल की वार्ता मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा और मुख्य सचिव सहित आला अफसरों की मौजूदगी में हुई। वार्ता के दौरान उप मुख्यमंत्री द्वारा हर मामले में अनभिज्ञता और आश्वासन मिलने के बाद मंच की तरफ से वार्ता को असफल बताते हुए आन्दोलन जारी रखने का ऐलान किया गया। इस द्विपक्षीय वार्ता में मंच की तरफ से बाबा हरदेव सिंह, डा. दिनेश शर्मा, हरिकिशोर तिवारी, एमएलसी संजय मिश्रा, राजबहादूर चंदेल, निखिल शुक्ला, हरिनाम सिंह, सुधीर पवार, रामफेर पाण्डेय और रामराज दुबे मौजूद थे।

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