प्राचीन चिकित्सा पद्धति के क्षेत्र में काम करना प्रशंसनीय : नाइक

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लखनऊ – किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में मरीजों को ऐलोपैथी इलाज के साथ आयुर्वेदिक, यूनानी सहित अन्य प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों का भी लाभ मिल सकेगा। इसके लिए जल्द ही यहां आयुष विभाग की स्थापना की जायेगी। इसकी घोषणा सोमवार को केन्द्रीय आयुष मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित समारोह में की। इस अवसर पर विराज नाम के बच्चे को केन्द्रीय आयुष मंत्री श्रीपद येसो नाईक जी द्वारा स्वर्णप्राशन दवा पिलाई गई। समारोह में चिकित्सा शिक्षा एवं प्रविधिक शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन के साथ आयुष मंत्री धर्म सिंह सैनी के अलावा सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा भी मौजूद थे। सभी ने केजीएमयू एवं आरोग्य भारती द्वारा चलाये जा रहे गोरखपुर में चलाये जा रहे निशुल्क चिकित्सा शिविर व स्वर्णप्राशन कार्यक्रम की बधाई दी।

मुख्य अतिथि मौजूद केन्द्रीय मंत्री नाइक ने कहा कि गोरखपुर जिले में केजीएमयू एवं आरोग्य भारती द्वारा चलाए जा रहे है निशुल्क चिकित्सा शिविर एवं मस्तिष्क ज्वर से प्रभावित बच्चों के लिए स्वर्णप्राशन कार्यक्रम की बेहतर है। उन्होंने कहा कि आज भी देशभर में आधुनिक चिकित्सा पद्धति के अत्याधिक प्रचलन के बावजूद भी केजीएमयू जैसी संस्थाओं द्वारा इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति के क्षेत्र में काम किया जाना प्रशंसा योग्य हैं। चिकित्सा शिक्षा एवं प्रविधिक शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने जापानी इंसेफेलाइटिस से पीड़ित गोरखपुर के बच्चों के लिए केजीएमयू एवं आरोग्य भारती द्वारा लगाए लगे नि:शुल्क चिकित्सा शिविर एवं स्वर्णप्राशन कार्यक्रम की प्रश्ंासा करते हुए आयुवेर्दिक चिकित्सा पद्धति को आधुनिक चिकित्सा पद्धति का छोटा भाई कहे जाने पर कहा कि अगर ऐसी ही इस पद्धति को आगे बढ़ाने का कार्य जारी रहा, तो अंतिम परिणाम आने अभी बाकी है और निसंदेह ला ेग इसे बड़े भाई का दर्जा देंगे क्योंकि उम्र तो आयुवेर्दिक चिकित्सा पद्धति की ही बड़ी है।

इस अवसर पर प्रदेश के आयुष मंत्री धर्म सिंह सैनी ने कहा कि आयुष चिकित्सक यदि प्राचीन चिकित्सा पद्धति के द्वारा इलाज में लेने लगें तो इस क्षेत्र में क्रांति लाई जा सकती है। उन्होंने केजीएमयू में आयुष विभाग के लिए हर प्रकार के सहयोग की बात की। सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा ने भी आयुष विभाग की स्थापना के लिए हर सं भव मदद देने की बात कही। केजीएमयू के कुलपति प्रो एमएलबी भट्ट ने कहा कि लगभग 70 फीसदी बीमारियों का कारण हमारी खराब दिनचर्या है। उन्होंने ऐलोपैथी, आयुर्वेदिक, यूनानी सहित अन्य प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों के द्वारा एक ही छत के नीचे इलाज किए जाने को आज के समय की जरूरत बताया। कार्यक्रम का संचालन ट्रॉमा सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं सोशल आउटरीच सेल के सचिव डा संदीप तिवारी ने किया।

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