हलक में अटका टूथब्रश, इस तकनीक से निकाला

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लखनऊ। टूथब्रश से जीभ साफ करते हुए वक्त हलक के अंदर तक सफाई करना महंगा भी पड़ सकता है। झटके में सांस खींचने वक्त टूथब्रश अंदर भी जा सकता है आैर यह बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है। जौनपुर निवासी युवक के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। गले में अटके टूथब्राश को जब स्थानीय डाक्टरों ने निकालने में हाथ खड़े कर दिये तो परिजन केजीएमयू के गैस्ट्रोलॉजी विभाग पहुंचे। यहां पर एंडोस्कोपी की विशेष तकनीक से टूथब्रश निकालने में सफलता प्राप्त की।

बताते चले कि जौनपुर के महराजगंज निवासी मनोज पटेल (27) मंगलवार को सुबह टूथब्रश से जीभ की सफाई कर रहे थे। इसी दौरान जीभ के पिछले हिस्से को साफ करते समय टूथब्रश झटके से खाने की नली में चला गया। उसके बाद तो श्वसन प्रक्रिया में भी परेशानी शुरू हो गई। आनन-फानन में लोगों के कहने पर काफी देर पीठ ठोंकी गयी, टूथ ब्रश नही निकला तो लिटाया गया आैर पानी पिलाया गया। बाहर निकलने की बजाय ब्रश अंदर सरका आैर खाने की नली और पेट के बीच में फंस गया। इसके बाद सांस लेने के साथ पेट में भी दर्द होने लगा। सभी लोग भागकर स्थानीय अस्पताल ले गए।

यहां डॉक्टरों ने जांच में गंभीर होता देख केजीएमयू भेज दिया। सभी अफरा-तफरी में मरीज को लेकर केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। यहां से ट्रॉमा से मरीज को शताब्दी फेज दो में भेज दिया गया। यहां गैस्टोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. सुमित रुंगटा ने मरीज का एक्सरे कराया। जांच में टूथब्रश अटका दिखाई दिया। उन्होंने तुरंत ब्रश निकालने का फैसला लेते हुए एंडोस्कोप यूनिट तैयारी करायी। वह जब तक एंडोस्कोपी शुरू करते टूथब्रश पेट तक पहुंच चुकी थी। एंडोस्कोपी की विशेष तकनीक के अलावा अन्य उपकरणों की मदद से टूथब्राश को पेट से खाने की नली एवं मुंह के रास्ते से बाहर निकालने में सफलता मिल गयी।

इस प्रक्रिया में आधे घंटे का समय लग गया। मजे की बात यह थी कि मरीज को बेहोशी नहीं देनी पड़ी। शाम को मरीज को डिस्चार्ज भी कर दिया गया। डॉ. सुमित का कहना है कि वजन ज्यादा न हो लालच में लड़के और लड़कियां खाना खाने के कुछ देर बाद टूथब्रश की मदद से उल्टी करते हैं। इस वजह से टूथब्रश गटकने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि साल में एक से दो घटनाएं इस तरह की आ रही हैं।

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