गाड़ी खा रही हवा, तीमारदारों को काट रहे….

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लखनऊ । गोमती नगर स्थित डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के कहे जाने वाले रैन बसेरा में बीती रात कनखजूरा निकल आने से मरीजों में हड़कम्प मच गया। टूटे पलंग पर किसी तरह रात गुजार रहे चंद तीमारदार भाग कर बाहर निकल गये। वह गैराज की तरफ गये, तो वहां पर तैनात सुरक्षा गार्डो ने भगा दिया। पार्किंग में खड़ी गाड़ियों के लिए पंखे लगे हुए है, लेकिन तीमारदारों को रूकने के स्थायी रैन बसेरा नहीं बन सका है।

लोहिया संस्थान में उच्चस्तरीय इलाज के लिए आस-पास जनपदों के ही नहीं बल्कि दूर -दूर से मरीज इलाज कराने के लिए आते है, इनमें कैंसर, न्यूरो, यूरो के अलावा अन्य बीमारियों के लिए मरीज हफ्तों नहीं बल्कि महीनों तक रूकते है। यहां पर मरीजों व तीमारदारों के लिए अभी तक स्थायी रैन बसेरा नहीं बन पाया है। लोहिया संस्थान ने आैपचारिकता करते हुए मेनगेट के पास टीनशेड के नीचे चार -पांच पलंगों का अस्थायी रैन बसेरा बना दिया है। यहां पर तीमारदारों के लिए टूटे पलंग है, जिनमें लोहे के रॉड निकले हुए है। उनसे तीमारदारों को अक्सर चोट लग जाती है। यहां पर गंदगी को कोई सफाई करने के लिए नहीं आता है। तीमारदार खुद ही सफाई करते रहते है।

बीतीरात तीमारदार खाना बनाने के बाद टूटे पलंग के बिस्तर पर लेटे तो उन्हें कुछ चुभता सा लगा, तो उन्होंने मोबाइल टार्च की रोशनी में देखा तो कोने में कनखजूरा चिपका हुआ था। इसके बाद उसको हटाने को लेकर वहां पर हड़कम्प मच गया। इसके बाद तीमारदार रात बिताने के लिए पीछे की ओर बने गैराज की तरफ गये तो वहां पर तैनात सुरक्षागार्ड ने भगा दिया। बताते चले कि इस ओपन पार्किंग में प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियां खडी होती है। यहां पर ऊपर बिजली के पंखे लगे हुए है, जो कि इस गाड़ियों को हवा देते रहते है आैर तीमारदार रात में रूकने के लिए जगह तलाश करते रहते है। अगर प्रशासनिक अधिकारियों की माने तो यहां पर स्थायी रैनबसेरा बनने के लिए प्रस्ताव बना है, पर अभी तक यहां मामला ठंडे बस्ते में है।

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