चेहरे व आंखों के नीचे के गड्डे भरेगें ऐसे…

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लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के स्थित दंत संकाय स्थित मैक्सिलोशियल सर्जरी विभाग के विशेषज्ञों  की टीम ने आटोलोगस फैट ट्रांसप्लांट तकनीक का प्रयोग करते हुए चेहरे पर बने गड्ढे व आंखों के नीचे गहरे भाग को फैट से भर दिया। इस तकनीक के प्रयोग से चेहरे में लम्बे वर्षो से चली आ रही समस्या को दूर कर दिया गया। विशेषज्ञ डा. दिव्या मेहरोत्रा का दावा है कि यह आटोलोगस फैट ट्रांसप्लांट निशुल्क किया गया है।

आटोलोगस फैट ट्रांसप्लांट तकनीक का प्रयोग करने वाली प्रोफेसर दिव्या मेहरोत्रा का दावा है कि   उन्होंने इस तकनीक का पहली बार यहां प्रयोग किया गया है। उन्होंने बताया कि लगभग पांच वर्ष पहले एक महिला अमिता ( बदला नाम)  उम्र 32 वर्ष उनके पास आयी थी। उसके  आंखों के नीचे और गाल में गड्ढा था, जिसके कारण वह बेहद परेशान रहती थी।  कई क्लीनिकल उपाय करने के बाद भी उसे दिक्कत से निजात नहीं मिल सकी थी। उन्होंने उसके चेहरे पर आटोलोगस फैट ट्रांसप्लांट करने का निर्णय लिया।  यह सफलता पूर्वक  किया गया और अब वह पूर्ण रूप से स्वस्थ्य है।
डा. दिव्या ने बताया कि यह सर्जरी कई वर्ष तक चेहरे की देखरेख के बाद किया गया।

उन्होंने बताया कि आंख के नीचे गड्ढे को भरने के लिए विशेष तकनीक से इंजेक्शन के माध्यम से पेट के नीचे मोटा फैट लिया गया और उसे फिर  इंजेक्शन से ही आंख के नीचे गहरे वाले भाग में इंजेक्ट कर दिया गया। इससे पहला चीरा लगाकर पेट से फैट का टुकड़ा काट कर मुंह के अंदर गड्ढे में फिक्स किया गया। उन्होंने बताया कि इस सर्जरी में  करीब एक घंटे का समय लगा है। प्रो. दिव्या ने बताया कि उनके यहां सर्जरी में कुछ भी खर्च नहीं आया। डा. दिव्या ने बताया कि इस प्रकार का आटोलोगस ट्रांसप्लांट आंख के नीचे कालापन आना, चेहरे पर कहीं पर भी फुलनेस कम होने पर , जबड़े टूटने पर, होंट कटने पर, मुंह न खुलने पर इसी प्रकार जबड़े से संबंधित सभी बीमारियों होने पर इस तकनीक का सहारा लिया जाता है।

चेहरे विकृत  होने पर भी इस तकनीक से सर्जरी का प्रयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी सर्जरी प्राईवेट हॉस्टिपलों में कराने पर करीब 2 लाख रुपयों से ज्यादा का खर्च आता है। डा. दिव्या ने बताया कि विभाग में अभी कुछ 9 डॉक्टर हैं, जिसमें दो डॉक्टर ओरल कैंसर के भी हैं। डा. मेहरोत्रा ने बताया कि अक्सर महिला या पुरुष चेहरों पर गड्ढ़ों से परेशान रहते थे, वह तरह – तरह से उपाय करते रहते है। उनकी टीम में डॉ. दीप्ति ,डॉ. यू विग्नेश, डॉ. प्रवीण सिंह, डॉ. सहीफा बेगम, डॉ. सुजय भावे शामिल थे।


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