भर्ती है या नहीं बतायेगा साफ्टवेयर, तभी मिलेगा निशुल्क ब्लड

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लखनऊ। नेशनल हेल्थ मिशन से साढ़े सात करोड़ रुपये मिलने के बाद किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में भर्ती मरीजों को निशुल्क ब्लड यूनिट दिये जाने जा रहा हो, लेकिन अब जब तक केजीएमयू ई बैंकिग साफ्टवेयर पर मरीज की भर्ती नहीं दिखेगी, तब तक निशुल्क ब्लड यूनिट नहीं दिया जाएगा। इसके लिए भर्ती के वक्त डाक्टर के हस्ताक्षर होना आवश्यक हो गया है। ब्लड बैंक ने यह कदम दलालों की रोकथाम के लिए उठाया है।

केजीएमयू के ब्लड बैंक को नेट जांच व अन्य जांचों के लिए नेशनल हेल्थ मिशन ने तहत बजट दिया गया है। इसके बाद ब्लड बैंक ने भर्ती मरीजों को निशुल्क ब्लड यूनिट देने की घोषणा कर दी है। निशुल्क में मरीज चाहे जनरल वार्ड में भर्ती हो या प्राइवेट वार्ड में भर्ती हो। उसे स्क्रीनिंग शुल्क नहीं देना होगा। निशुल्क जांच ब्लड यूनिट देने के साथ ही दलालों ने भी अपनी जुगत लड़ा दिया। बताया जाता है कि दलालों ने पचास रुपये का पंजीकरण करा कर पर्चा बनाकर भर्ती शुल्क भी जमा करके आईपीडी व यू आईडी नम्बर हासिल कर लिया। इसके बाद ब्लड बैंक से ब्लड यूनिट लेने वाला फार्म भरके शुल्क लेने चले गये।

ऐसे में मरीज तो आईपीडी व यूआईडी नम्बर के आधार पर मरीज को भर्ती मानकर नेट जांच का ब्लड निशुल्क दे दिया गया। परन्तु ब्लड बैंक प्रशासन ने इसका भी तोड़ कर दिया है। ब्लड बैंक प्रभारी डा. तूलिका बताती है कि इसको रोकने के लिए केजीएमयू ई बैंकिं ग साफ्टवेयर की मदद ली जाएगी। इसके लिए आईपीडी व यूआईडी के कॉलम को अलग-अलग कर दिया गया है। वार्ड में भर्ती करने के लिए भर्ती शुल्क की रसीद देखकर भर्ती प्रक्रिया पूरी करके डाक्टर हस्ताक्षर करता है। मौके पर रेजीडेंट हो या अन्य कोई डाक्टर उसके भर्ती करने के बाद साफ्टवेयर पर भर्ती डाक्टर के हस्ताक्षर के साथ शो करेगा। तब ही ब्लड यूनिट निशुल्क दिया जाएगा।

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