भारत में ७२ मिलियन लोग मधुमेह की चपेट में

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-युवाओं पर मंडरा रहा मधुमेह का खतरा
-४६ प्रतिशत जनसंख्या मधुमेह के मुहाने पर
-२०४० तक १२४ मिलियन लोगों हो सकते हैं मधुमेह के शिकार

लखनऊ। केजीएमयू के स्त्री एवं प्रसूति विभाग तथा इनर व्हील कल्ब ऑफ लखनऊ बरादरी के संयुक्त तत्वाधान में मंगलवार को कलाम सेंटर में विश्व मधुमेह दिवस पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें ”गर्भावस्था मधुमेह शीर्षक पर विशेषज्ञों ने चर्चा की। इस अवसर पर केजीएमयू के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. वीनिता दास ने बताया कि पूरे विश्व में ३८२ मीलियन लोगो को मधुमेह है जिसमें भारत में ७२ मीलियन लोग इस बीमारी से ग्रसित है। इस वजह से हमारा देश विश्व में मधुमेह की राजधानी के नाम से जाना जा रहा है। वर्तमान समय में २० से २५ साल की उम्र से ही लोग इस बीमारी से ग्रसित होने लगे है।

हमारे देश में ४६ प्रतिशत जनसंख्या ऐसी है जिसे मधुमेह तो नही है लेकिन वह इस बीमारी के संभावित मरीज हो सकते है। यह बीमारी पूरे विश्व में सबसे अधिक चीन, यूएस एवं भारत में पाई जाती है। इस बीमारी से ग्रसित होने वाले मरीज अधिकतर निम्न एवं मध्यम आयवर्ग के लोग होते है। इस बीमरी से २००९ मे ५१ मीलियन लोग, २०१५ में ७० मीलियन लोग तथा आने वाले २०४० तक लगभग १२४ मीलियन लोग इस बीमारी के शिकार हो सकते है। इस बीमारी की वजह से हृदय, गुर्दा एवं आखें तो खराब होती है साथ ही व्यक्ति की मृत्यु भी जल्दी होती है। गर्भावस्था में महिलाओं की ब्लड शुगर की जांच अति आवश्यक है। १४ से १७ प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में गर्भा अवस्था के दौरान मधुमेहद्ध पाया जाता है। इसके अलावा १५ से २० प्रतिशत गर्भवती महिलाएं ऐसी होती है जो पहले से ही मधुमेह की मरीज होती है।

कार्यक्रम में प्रो. अमिता पाण्डे ने बताया कि जिन महिलाओं में जीडीएम पाया जाता है उनमे से ४० से ५० प्रतिशत महिलाओं में दूसरे गर्भ धारण के दौरान जीडीएम होने का बहुत ज्यादा खतरा रहता है। इनमें से ५० से ६० प्रतिशत महिलाओं को अगले दस वर्षो में टाइप टू डायबिटीज होने का खतरा रहता है तथा इन महिलओं से जन्म लेने वाले २० से ३० प्रतिशत शिशुओं में टाईप टू डायबिटीज होने के चांसेज होते है।

डा. स्मृति अग्रवाल ने बताया कि जिन महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान जीडीएम होता है उनमें विभिन्न तरह के गंभीर बीमारी होने का खतरा रहता है। इनमे से ज्यादा तर महिलाओं का जल्द एबार्सन हो जाना, बच्चे में कांजीनिटल विकृति, बच्चे के आकर में ज्यादा वृद्धि जिससे नार्मल प्रसव कराने में कठिनाई होना आदि दिक्कते होती है। जीडीएम की वजह से परिवर में दो से तीन जनरेशन तक की मधुमेह की विकृति पैदा होने का खतरा रहता है।

कार्यक्रम में चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मदनलाल ब्रह्म भट्ट ने कहा डायबिटीज की दृष्टि से भारत में सबसे ज्यादा संख्या हैं इसलिए इसे मधुमेह की राजधानी माना जाता है। ये बीमारी जीवन शैली से जुड़ी है। तनाव ग्रस्त लोगो को मधुमेह होने का ज्यादा खतरा रहता है। आधुनिक शोध से पता चला है कि उचित जीवन शैली से ५० प्रतिशत मधुमेह रोगियों को मधुमेह से राहत मिल जाती है और उनका मधुमेह नियंत्रित हो जाता है। इसके लिए नियमित व्यायाम, ४० से ५० मिनट पैदल चलना या १०००० कदम पैदल चलना, सात से आठ घण्टे नीद, समय से सोना समय से जागना एवं पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। प्रतिदिन ४० मिनट तक सूर्य की रोशनी में रहना चाहिए। योग एवं सूर्य नमस्कार से भी डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है। अपने कार्य को तनाव कम रखते हुए करना चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि अपने सारे कार्य समय से पूरा कर लेना चाहिए।

कार्यक्रम विनिता दास ने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला को अपने गर्भावस्था के दौरान कम से कम एक बार मधुमेह की जांच जरूर करानी चाहिए। गर्भावस्था के दौरान २४ से २८ सप्ताह के एवं ३२ वे सप्ताह में मधुमेह की जांच करानी चाहिए। इसके लिए ७५ ग्राम ग्लूकोज को पानी मे घोल कर पीने के दो घण्टे बाद ग्लूको मीटर से इसकी जांच की जाती है। गर्भावस्था की सुगर वैल्यु नार्मल अवस्था की सुगर वैल्यु से कम होती है। इस बीमारी से ग्रसित महिलाओं को अस्पताल में ही प्रसव कराना चाहिए। गर्भवती के डाइट में एक तिहाई प्रोटिन की मात्रा अधिक और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होनी चाहिए। गर्भावस्था के दौरान मधुमेह से पीडि़त महिलाओ को प्रसव के ६ सप्ताह बाद फिर से अपने ब्लड सुगर की सम्पूर्ण जांच करानी चाहिए।

कार्यक्रम में प्रो. नरसिंह वर्मा द्वारा ब्लड सुगर के निम्न रिस्क फैकक्टर्स के सम्बंध में बताया गया-उम्र, परिवार में ब्लड सुगर का इतिहास, शारीरिक परिश्रम कम होना, अधिक वजन एवं मोटापा, ज्यादा फैटी खाना एवं कम फाइबर युक्त खाना इत्यादि। कार्यक्रम में प्रो. कौसर उस्मान ने बताया कि टाइप -१ डायबिटीज बच्चो में होती है जबकि टाइप टू डायबिटीज बड़ो की बीमारी है। किन्तु अब अपने देश में टाईप टू डायबिटीज कक्षा आठ और कक्षा ९ के बच्चों मे भी पाई जाने लगी है।

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