औषधीय पौधे नपुंसकता के इलाज में मददगार : प्रो शंखवार

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लखनऊ। शोध कर रहे विशेषज्ञ डाक्टरों का मानना है कि औषधीय पौधे आदमी की नपुंसकता के इलाज में मददगार साबित हो सकते हैं। राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) के तत्वावधान में गुरूवार को विज्ञान दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो एस एन शंखवार ने कहा कि 10 से 15 फीसदी युगल संतान सुख से वंचित रह जाते हैं 7 इनमें से लगभग 50 प्रतिशत मामलों में नर नपुंसकता जिम्मेदार होती है लेकिन अधिकांश मामलों में इसका जिम्मेदार महिलाओं को ठहराया जाता है जिससे उनको काफी मानसिक तकलीफ से गुजरना पड़ता है।

उन्होने कहा कि इससे प्रभावित लोगों में हार्मोन स्तर में अनियमितता, रोजमर्रा की तनाव भरी जिन्दगी, शारीरिक विकृतियों आदि के चलते शुक्राणुओं की कमी, शुक्राणुओं की गतिविधि में कमी अथवा शुक्राणु निर्जीवता देखी जाती है 7 उन्होंने बताया बहुत से औषधीय पौधे जैसे अश्वगंधा, शतावर,पिप्पली, कापीकच्चू, बाला आदि हैं जो नर नपुंसकता के उपचार में सहायक हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि उपचार के अतिरिक्त जीवन दिनचर्या में तनाव मुक्ति के लिये कुछ समय स्वयं को दिए जाने, नशे से दूर रहने, नियमित व्यायाम एवं अच्छी नींद लिए जाने की भी आवश्यकता है। इस मौके पर एनबीआरआई के निदेशक प्रो. एस के बारिक ने कहा कि आज ही के दिन प्रोफेसर सर सी.वी. रमन (चंद्रशेखर वेंकटरमन) ने 1928 में कोलकाता में एक उत्कृष्ट वैज्ञानिक खोज की थी, जो ‘रमन प्रभाव” के रूप में प्रसिद्ध है। इस कार्य के लिए उनको 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनकी इस उपलब्धि की याद में वर्ष 1986 से प्रतिवर्ष देश भर में 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति आकर्षित करना, विज्ञान के क्षेा में नए प्रयोगों के लिए प्रेरित करना तथा विज्ञान एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति सजग बनाना है।

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