हर वक्त मोबाइल खोने का डर, कहीं आपको नोमोफोबिया तो नहीं

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Source: http://lifestyle.okezone.com/

अगर आपको हर वक्त अपने मोबाइल खोने का डर सता रहा है तो इसका मतलब है कि आप ‘नोमोफोबिया’ नामक बीमारी का शिकार हो चुके हैं। दुनिया में होने वाली हर तरह की बीमारियों में एक नई और भयानक बीमारी का शुमार हो गया है, यह है नोमोफोबिया, इसका मोबाइल फोन खोने का डर। एक अध्ययन के अनुसार लंदन में नोमोफोबिया आज के दौर की एक गंभीर समस्या है। यह अध्ययन चार वर्ष पूर्व इसी विषय पर हुए एक शोध को आगे बढ़ाते हुए किया गया है। चार साल पूर्व जहां यह आंकड़ा 53 प्रतिशत था, वहीं अब यह बढ़कर 66 प्रतिशत हो गया है। वहीं आजकल इस बीमारी ने भारत में भी दस्तक दे दी है।

एक अध्ययन में 66 फीसद लोगों ने कहा कि उन्हें हर समय अपने मोबाइल फोन के खोने का डर सताता रहता है। वहीं 18 से 24 वर्ष के बीच के युवाओं में मोबाइल के प्रति सबसे ज्यादा लगाव होता है। इस उम्र के करीब 77 फीसद लोग अपने मोबाइल के बिना एक मिनट भी नहीं रह सकते।

25 से 34 आयुवर्ग के लोग मोबाइल के प्रति रखते हैं खास लगाव, 25 से 34 आयुवर्ग के 68 फीसद लोग मोबाइल के प्रति खास लगाव रखते हैं। अध्ययन में कहा गया है कि औसतन एक व्यक्ति एक दिन में करीब 37 बार अपना मोबाइल फोन जांचता है। अध्ययन में यह भी कहा गया है कि करीब 75 फीसद लोग बाथरूम में अपने मोबाइल का प्रयोग करते हैं। इसका प्रमुख कारण यह भी है कि वर्तमान में लोग मोबाइल फोन का उपयोग बतौर समाचार पत्र भी करते हैं। वहीं अध्ययन में यह भी कहा गया है कि मोबाइल का प्रयोग करने वाले करीब 49 फीसद ऐसे हैं जिनका संदेश यदि उनके साथी भी पढ़ लें तो वह दुखी हो जाते हैं। वहीं केवल 46 प्रतिशत लोग ही अपने मोबाइल में किसी प्रकार का सुरक्षा लॉक इस्तेमाल करते हैं।

फोबिया किसी भी तरह का हो सकता है –

असल में फोबिया शब्द ग्रीक भाषा के एक शब्द हाइड्रोफीबिया से आया है, जिसका मतलब होता है पानी से सम्पर्क में आने का मानसिक भय और फोबिया किसी भी तरह का हो सकता है जिसका मतलब है अगर हमे किसी चीज़ का फोबिया है ,तो हम उस चीज़ के लिए मानसिक तौर पर थोड़े असहज है। इसे किसी भी स्थान वस्तु या गतिविधि से जोड़ा जा सकता है और हमारी तकनीक की सदी यानि के इक्कीसवी सदी हो है उसमे टेक्नोलोज़ी के बढ़ते इस्तेमाल ने मानवीय जीवन को सुगम बनाने के साथ साथ कई तरह की मानसिक समस्याएं हमे सौगात में दी है जिसमे से नोमोबिया भी एक है और मेल ऑनलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक हम में से 66 प्रतिशत लोग इस से पीड़ित है इसमें व्यक्ति को अपने मोबाइल फ़ोन के गुम हो जाने का भय रहता है और वो भी इस कदर कि ये लोग जब टॉयलेट भी जाते है तो अपना मोबाइल फोन साथ लेके जाते है और दिन में औसतन तीस से अधिक बार ये अपना फोन चेक करते है ।

कहीं गर्लफ्रेंड का फोन घर पर कोई न उठा ले –

असल में ऐसे लोगों को डर होता है कि फोन के घर पर या कही भूल जाने पर इनका कोई मैसेज या कॉल छूट जायेगा, जबकि यही डर इनके व्यवहार और व्यक्तित्व में भी बदलाव का कारण बनता है । अगर ये अपना फोन घर भूल भी जाएं तो उच्च रक्तचाप और हृदयगति बढ़ जाने जैसी समस्या सामने आती जबकि असल में ये तो हर कोई बताएगा कि इस से ग्रस्त लोग 18 से 24 के बीच होती है लेकिन ये कोई नहीं बताएगा की भारतीय समाज में चूंकि प्रेम प्रसंगो को लेकर कुछ अधिक सामाजिक पाबंदियां है और मेरे जैसे नौजवान लड़के और लड़कियों को हमेशा यही डर लगता है कि फोन घर पर भूले नहीं कि पापा या मम्मी कंही गर्लफ्रेंड का फोन न उठा ले, क्योंकि भारत में तो यही एक मात्र मुख्य कारण है।

कैसे जांचें कि आप हैं नोमोफोबिया का शिकार ?

आप खुद अपनी जांच कीजिए, कहीं आप भी इस बीमारी के शिकार तो नहीं। कहीं बार-बार आपको भी मोबाइल खोने का डर तो नहीं सता रहा है। राह चलते कहीं आप भी अचानक अपनी जेब तो नहीं टटोलने लगते हैं। अगर ऐसा है तो आप नोमोफोबिया के शिकार हो सकते हैं। लंदन में हुए एक अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है। वहीं भारतीय डॉक्टर भी इस बात से इत्तेफाक रखते हैं। केजीएमयू के मनासिक रोग विभाग के प्रमुख डॉ.पीके दलाल ने भी माना कि जिस प्रकार बदलते जीवन की बदलती जरूरतों में मोबाइल इंसानों के जीवन का हिस्सा बन गया है, उसमें ऐसा होना तो तय है।

डॉ.दयाल  ने बताया कि इसमें दो राय नहीं है कि भारतीय लोग पहले से ही मोबाइल मेनिया से शिकार हैं। हां, यह एक अलग अध्ययन है। इससे इन्कार नहीं किया जा सकता है कि भारत में भी ऐसे लोग हैं, जिन्हें यह डर सता रहा है, लेकिन इस पर अभी कोई अध्ययन नहीं हुआ है। डॉ.दलाल का कहना है कि किसी चीज की हद से ज्यादा आदत बुरी होती है। आदतों को संतुलित करना इंसान के हाथ में है। जब आप घर में हों तो खुद को मोबाइल से दूर रखें, सोते समय उसे दूर रखें। अगर ऐसा नहीं करेंगे तो इसका असर आपके मानसिक संतुलन पर पड़ेगा।
क्या करें

नोमोफोबिया से पीड़ित हैं तो नज़र डालिये इन सात लक्षणों पर

  1. मोबाइल खोने का सपना आना: क्या आपको रात में मोबाइल खोने का सपना आता है और आप उसे पकड़ने के चक्कर में घबरा कर उठ जाते हैं? जो कुछ भी हमारे मन में 24 घंटो चल रहा होता है हम केवल उसी के बारे में सपना सोचते हैं।
  2. मोबाइल  के साथ सोना: इसमें इंसान को अपने मोबाइल के बिना नींद नहीं आती। वह मोबाइल को या तो अपने बगल में रखते हैं या फिर अपनी तकिया के नीचे।
  3. मोबाइल  ना मिलने पर पसीने छूटना: मान लीजिये कि आपने मोबाइल को गलती से कहीं रख दिया और अब उसे ढूंढ नहीं पा रहे हैं तो जाहिर सी बात है कि आप परेशान हो जाएंगे। थोडी बहुत चिता करने से कुछ नहीं होता लेकिन अगर वही मोबाइल खो जाने पर आपके पसीने छूटने लगें और आप खुद को असहाय महसूस करने लगे तो समझ लीजिये कि मामला गंभीर है।
  4. बाथरूम  में मोबाइल साथ ले जाना: कई लोगों को लगता है कि उनके बाथरूम जाने पर कोई जरुरी कॉल आ जाएगी इसलिये वे मोबाइल को ले कर जाते हैं।
  5. दो  मोबाइल फोन रखना: कई लोगों को लगता है कि यदि उनका पहला मोबाइल खो जाए तो दूसरा वाला तुरंत काम आएगा। पर 2-2 मोबाइल फोन रखने कि इतनी चिता करना मतलब कहीं कुछ गड़बड़ है।
  6. लो  बैटरी लो मूड: अगर फोन की बैटरी बिल्?कुल ला शो हो रही हो तो ऐसे लोगों को क्रोध आने लगता है। कई लोग तो डिप्रेशन में भी चले जाते हैं।
  7. फ्लाइट  मोड: यदि आप प्?लेन से नीचे उतरते ही तुरंत अपने फोन को फ्लाइट मोड से हटा कर नार्मल मोड पर कर लेते हैं तो इसका यह मतलब है कि आप दुनिया से कटे रहना पसंद नहीं करते।

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