अपनी आंतों का रखें ख्याल

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लखनऊ – प्रमुख प्रोबायोटिक कंपनी याकुल्ट डैनन इंडिया प्रा. लि. ने दुनिया भर में मशहूर प्रोबायोटिक ड्रिंक याकुल्ट के फायदों और गुणों पर मीडिया के साथ एक सूचनाप्रद एवं संवादपरक सत्र का आयोजन किया। इस मीडिया ब्रीफिंग का आयोजन याकुल्ट डैनन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री मिनोरू शिमादा और याकुल्ट डैनन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के महाप्रबंधक-विज्ञान एवं विनियामकीय मामले, डॉ. नीरजा हजेला द्वारा किया गया।

इस अवसर पर डॉ नीरजा हजेला, महाप्रबंधक, याकुल्ट डैनन इंडिया प्रा. लि. ने कहा, ‘‘वर्तमान मे भारत मे बदलाव हो रहा है। नई आक्रमकता, अभिप्रेरणा और जोश के साथ, यह दुनिया पर छाने के लिये तैयार है। हालांकि, स्वास्थ्य के मानक बताते हैं कि प्रत्येक 10 में से 7 भारतीयों में जीवनशैली से संबंधित रोगों का खतरा होता है और ऐसे में अपनी सेहत पर ध्यान देने की जरूरत है, इससे पहले कि बहुत अधिक देर न हो जाये।‘‘

तो फिर आपकी सेहत का हाल क्या है? दरअसल आंतों या शरीर के सबसे बड़े रोग-प्रतिरोधक अंग में लगभग 70 प्रतिशत रोग-प्रतिरोधक कोशिकायें पाई जाती हैं। आपको सुरक्षित रखने और रोगों के खतरे को कम करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिये, आंतों की सेहत बेहद जरूरी है और इसका फैसला 100 ट्रिलियन जीवों (इंटेस्टाइनल फ्लोरा) द्वारा होता है, जो यहां पर पाई जाती हैं। ये जीव भोजन के उपयुक्त पाचन, पोषकतत्वों के अवशोषण, रोग प्रतिरोधक क्षमता के निर्माण और आवश्यक विटामिनों जैसे कि विटामिन ‘बी‘ और विटामिन ‘के‘ के उत्पादन में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, इन जीवों की गतिविधियां विभिन्न कारकों जैसे कि असंतुलित आहार, तनाव, खराब हाइजीन, एंटिबायोटिक्स, नींद की कमी और प्रदूषण की वजह से अशांत रहती हैं, जिससे हानिकारक रोगों में बढ़ोतरी होती है और सेहत पर काफी नकारात्मक असर पड़ता है।

प्रोबायोटिक्स, जिसका वास्तविक अर्थ है ‘जीवन के लिये‘, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित फंक्शनल फूड बनकर उभरा है। इससे हितैषी बैक्टीरिया को बढ़ाने, आंतों की सेहत को बेहतर बनाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता का निर्माण करने में मदद मिलती है। इस विषय में विस्तार से बताते हुये डॉ. हजेला ने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश में रहने वाले लोग खाने-पीने के बेहद शौकीन हैं, लेकिन प्रोटीन और वसा का उच्च मात्रा में सेवन करने से उनके पाचन स्वास्थ्य के लिये खतरा उत्पन्न हो जाता है और इससे आप जीवनशैली से जुड़ी कई बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। प्रोबायोटिक्स को अपने आहार में शामिल करने से पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता का निर्माण करने में मदद मिल सकती है। दुनिया भर से प्राप्त वैज्ञानिक आंकड़े बताते हैं कि प्रोबायोटिक्स से कब्ज, डायरिया के जोखिम को कम करने, ऊपरी श्वसन पथ के संक्रमण को घटाने और कुछ मामलों में कैंसर के खतरे को भी कम करने में मदद मिल सकती है।‘‘

याकुल्ट की वैज्ञानिक विरासत के बारे में बताते हुये डॉ. हजेला ने कहा कि याकुल्ट एक प्रोबायोटिक फर्मेन्टेड मिल्क ड्रिंक है, जिसे 1935 में जापान में लॉन्च किया गया था। दुनिया भर में 100 से अधिक मानवीय परीक्षणों द्वारा इसकी सुरक्षा एवं प्रभावशीलता की पुष्टि की गई है। याकुल्ट में 6.5 बिलियन लैक्टोबैसिलस कसेई स्ट्रेन शिरोटा पाया जाता है। यह वायरस एवं कैंसर कोशिकाओं पर हमला करने वाली नैचुरल किलर सेल्स की गतिविधि को बढ़ाकर पाचन को बेहतर बनाने एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता का निर्माण करने के लिये परीक्षित है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कॉलेरा एंड एन्ट्रिक डिजीजेज (एनआइसीईडी), कोलकाता द्वारा भारत में भी एक अध्ययन किया गया था। यह अध्ययन 1-5 वर्ष की उम्र के लगभग 4000 बच्चों पर किया गया। इस अध्ययन के परिणामों से पता चला कि 12 हफ्तों तक जिन बच्चों ने याकुल्ट का सेवन किया था, उनमें डायरिया के मामलों में 14 प्रतिशत तक कमी देखी गई। खासतौर से भारत जैसे देश में यह एक बेहद उपयोगी परिणाम था, जहां पर डायरिया के कारण हर साल 3 लाख बच्चों की मौत हो जाती है।

इस अवसर पर याकुल्ट डैनन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक, श्री मिनोरु शिमादा ने कहा कि, ”रोगों के खतरों को घटाने के लिये आहारों का सिद्धान्त 1990 के दशक की शुरुआत में जापान में लागू किया गया था। तब जापान आर्थिक रूप से कमजोर देश था और लोग रोगों एवं संक्रमण के कारण मर रहे थे। इन आहारों को क्रियाशील कहा जाता था और इसका सिद्धान्त उपचार करने के बदले आहारों के द्वारा रोगों की रोकथाम पर केन्द्रित था। हमारे संस्थापक और क्योटो विश्वविद्यालय, जापान के अणुजीव वैज्ञानिक डॉ. मिनोरु शिरोता का दृढ़ मत है कि स्वस्थ आँत हमारे रोगमुक्त दीर्घायु जीवन का मुख्य आधार है।

उन्होंने एक प्रोबायोटिक बैक्टिरीया लैक्टोबैसिलस केसी स्ट्रेन शिरोता (एलसीएस) को सफलतापूर्वक विलग किया, जिसके सहारे आँतों के स्वास्थ्य और प्रतिरोधी तंत्र में काफी सुधार हुआ। उन्होंने याकुल्ट नामक एक खमीरयुक्त दुग्ध पेय के रूप में इसे प्रस्तुत किया जिसे जापान में 1935 में आरंभ किया गया। याकुल्ट की उपलब्धता दस्त, पेचिस और अन्य संक्रामक रोगों से पीड़ित जापानवासियों के स्वास्थ्य के सुधार में काफी उपयोगी सिद्ध हुई थी।

वर्तमान में, 38 देशों और क्षेत्रों में हर रोज 3.5 करोड़ बोतल से ज्यादा याकुल्ट की खपत हो रही है। जापान, चीन और इंडोनेशिया में याकुल्ट सबसे मशहूर ब्रांड है। हालांकि, भारत हमारे लिए एक चुनौतीपूर्ण बाजार है, क्योंकि यहाँ प्रोबायोटिक्स के फायदों को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी है। इसलिए हमने लोगों को शिक्षित करने पर ध्यान केन्द्रित किया है और हमारे लिए यह प्रसन्नता की बात है कि अधिकाधिक भारतीय स्वास्थ्य संबंधी फायदों के लिए अपने दैनिक आहार में याकुल्ट को सम्मिलित कर रहे हैं।‘‘

‘‘इस साल से हमारी नई ब्रांड एम्बेसेडर बॉलीवुड अभिनेत्री और फिटनेस आइकन शिल्पा शेट्टी याकुल्ट के स्वास्थ्य संबंधित फायदों के बारे में जागरूकता का प्रसार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। याकुल्ट के फायदों को प्रचारित करने के लिये हम ढेरों प्रोमोशनल गतिविधियां आयोजित कर रहे हैं। हम सोनीपत में हमारी अत्याधुनिक इकाई का उत्पादन करते हैं और रिटेल के जरिये परिचालन करते हैं।‘‘

उत्तर प्रदेश के लिये अपनी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताते हुये श्री शिमादा ने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश भारत में सबसे बड़ा राज्य है और याकुल्ट ने 13 से अधिक शहरों में अपनी सुदृढ़ उपस्थिति दर्ज करा रखी है। हमारा इरादा विविध माध्यमों के जरिये हमारे ब्रांड के बारे में जागरूकता फैलाने का है।‘‘

श्री शिमादा ने आगे यह भी कहा कि, ”प्रोबायोटिक के फायदे इसके विशिष्ट स्ट्रेन पर निर्भर करते हैं और याकुल्ट में बैक्टरीया का अनूठा स्ट्रेन है। यदि नियमित रूप से इसका सेवन किया जाये, तो यह आपकी पाचन प्रणाली को मजबूत बनाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता का निर्माण करने में मदद कर सकता है। याकुल्ट में पाये जाने वाले बैक्टीरिया को खासतौर से ब्रेस्ट, कोलोरेक्टल और ब्लैडर कैंसर जैसे कुछ प्रमुख कैंसर के खतरों को कम करने की इसकी योग्यता के लिये भी परीक्षित किया गया है।‘‘

तो बस याकुल्ट की एक बोतल प्रतिदिन लेकर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ायें। क्योंकि ‘‘स्वस्थ आंतें सेहतमंद जीवन का आधार हैं‘‘ और ‘‘इलाज से रोकथाम बेहतर होता है।‘‘

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