अंतिम समय में बेटी को मां नहीं अलग कर सकी…

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लखनऊ। डा. निर्वाण पत्नी बेटी का शव देखकर बेहाल थे। वह तो होली के बाद बेटी आैर पत्नी से मिलने की खुशी थी, लेकिन उसे क्या उम्मीद थी कि दोनों का शव घर आएगा। राजाजीपुरम के सी-188 निवासी डॉ. ज्योति निर्वाण अपनी छह साल की बेटी नीति के साथ बस से लखनऊ आ रही थीं। हादसे में मां-बेटी की मौत हो गई। घटना के वक्त सहमी बेटी मां की छाती से चिपटी हुई थी। बेबस मंा भी अंतिम समय में अपनी लाडली बेटी को अलग नहीं करना चाहती थी । दोनों के शव को अलग नहीं किया जा सका। सुबह जब दोनों के शव राजाजीपुरम पहुंचे तो मुहल्ले के लोग गमगीन थे। डा.ज्योति के पति डॉ. निशांत निर्वाण बदहवास थे, हर कोई उन्हें सात्वंना देर रहा था।

शाम को राज्यपाल राम नाईक भी उनके आवास पर पहुंचे और दिवंगतों को श्रद्घांजलि दी, जिसके बाद दोनों को अंत्येष्टि केलिए जे जाया गया। परिजन अजय कुमार ने बताया कि डॉ. ज्योति निर्वाण पीजीआई के कैंसर विभाग में विशेषज्ञ थीं। जबकि पति डॉ. निशांत निर्वाण टुडियागंज के बाल महिला चिकित्सालय में तैनात थे। उनकेबड़े भाई डॉ. अनिल निर्वाण राजभवन में डाक्टर हैं और उनकी पत्नी डॉ. विनीता कैसरबाग रेडक्रॉस अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। ज्योति अपने पति, बेटी व सास केसरी देवी व ससुर केएल निर्वाण के साथ रहती थीं। केएल निर्वाण आरडीएसओ से सेवानिवृत्त हैं। डॉ. ज्योति की शादी दिसम्बर, 2011 में निशांत निर्वाण से हिसार में हुई थी। उनके पिता ने नोएडा में घर बनवाया था। जहां गत 23 मार्च को ज्योति बेटी के साथ पिता पवन कुमार केघर गई हुई थीं, जहां अगले दिन उनकी परीक्षा थी। उन्होंने परीक्षा दी और रात में पिता ने नोएडा से बेटी को बस में बिठलवाया। जहां देर रात एक्सप्रेस वे पर हादसा हो गया।

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