3 महीने, तीन डाक्टर- कर दिया यह चमत्कार

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लखनऊ। आपसी विवाद में कीटनाशक पीने के बाद युवती को यकीन नहीं था कि वह जिंदगी आैर मौत के बीच तीन महीने झूलने के बाद वह एक नयी जिंदगी पा सकेगी, परन्तु किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रॉमा सेंटर क्रिटिकल केयर यूनिट के प्रभारी डा. अविनाश के साथ उनकी टीम की डा. सुलेखा व डा. सुहैल ने खुद दिन – रात की कड़ी मेहनत से इस युवती जान बचा ली। खास बात यह थी कि इलाज के लिए धनराशि न होने बाद लगभग छह लाख रुपये खर्च करके भी 92 दिन तक वेंटीलेटर यूनिट में रखकर इलाज कर ठीक कर दिया। इन छह लाख रुपयों को केजीएमयू प्रशासन ने गरीब श्रेणी में आने के कारण खर्च वहन किया। फि लहाल युवती की हालत में सुधार होने पर डॉक्टरों ने उसे डिस्चार्ज कर दिया।

बंथरा के निवासी युवती आशा देवी ( बदला नाम) बीते साल आपसी विवाद में गुस्से के कारण घर में रखा कीटनाशक पी लिया था। बताते है कि परिजन उसे लेकर पहले निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां पर डॉक्टरों ने दो दिन इलाज के दौरान पचास हज़ार खर्च करा दिये। परिजन रामतीरथ ने बताया कि रुपये न होने के कारण निजी अस्पताल ने रेफर कराने के दबाव बनाया तो वह अपनी बहन को लेकर ट्रॉमा सेंटर आया था। यहां पर डाक्टरों ने जांच के बाद हालत गंभीर होने पर उसे क्रिटिकल केयर भेज दिया गया। डॉक्टरों ने जांच कराई तो पता चला कीटनाशक पीने से उसके आंतरिक अंग प्रभावित हो गये थे। इनमें लिवर, आहारनाल सहित अन्य अंग खराब होने लगे थे। आंतरिक अंग क्रियाशील होने पर बेहोशी की हालत में उसे पांचवे तल पर क्रिटकल केयर यूनिट में वेंटीलेटर पर रखा गया। यहां के प्रभारी डा. अविनाश अग्रवाल के नेतृत्व में युवती का इलाज शुरु किया गया।

डा. अग्रवाल के साथ डॉ.सुलेखा व डॉ. सुहेल ने युवती की गहन चिकित्सा में कड़ी मेहनत की अौर करीब 92 दिन तक इलाज किया। डा. अग्रवाल बताया कि युवती की हालत काफी जटिल थी। इलाज काफी महंगा जा रहा था। परिजनों की आर्थिक हालत सही नहीं होने के कारण नियमानुसार गरीब घोषित होने पर उसके इलाज का खर्च केजीएमयू प्रशासन ने उठाया। युवती के इलाज में करीब छह लाख से अधिक रुपए खर्च हो गये। क्रिटिकल केयर के प्रभारी डॉ. अविनाश अग्रवाल ने बताया 92 दिन तक उनकी टीम ने कड़ी मेहनत बाद युवती नया जीवन पा ली है। उसके डिस्चार्ज के बाद युवती की दवाएं अभी चलती रहेगी।

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